क्या आपका बच्चा अक्सर चिड़चिड़ा हो जाता है? क्या वह स्कूल जाने से पहले पेट या सिर दर्द की शिकायत करता है? या फिर रात में ठीक से सो नहीं पाता और बार-बार आप से डरावने और बुरे सपने आने की बात कहता है?
अगर सच में ये बात है तो ये सिर्फ शरारत या ध्यान अपनी तरफ आकर्षित करने का तरीका नहीं हो सकता। हो सकता हैं ये आपके बच्चों में एंग्जायटी और स्ट्रेस के शुरुआती संकेत हो सकते हैं।
हमलोग अक्सर सोचते हैं कि ये तो बच्चे हैं, उन्हें क्या और कैसा तनाव? लेकिन आज के जमाने कि सच्चाई यह है कि आज के समय में बच्चे भी बड़ों की तरह ही मानसिक तनाव से गुजर रहे होते हैं। पढ़ाई का काफी दबाव, सोशल मीडिया का असर, स्कूल में दोस्तों से तुलना, पेरेंट्स की ढेर सारी उम्मीदें – ये सब कि वजह से बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर भारी असर पड़ रहा हैं।
तो आइए जानते हैं इस पोस्ट में हम ये जानेंगे कि बच्चों में एंग्जायटी के लक्षण क्या हैं, इसके पीछे का कारण क्या हो सकता हैं, और सबसे महत्वपूर्ण ये कि घर पर ही बच्चों के तनाव को हम कैसे कम करें।
एंग्जायटी और स्ट्रेस क्या है?
एंग्जायटी या ये कहें (चिंता) एक सामान्य भावना है। जब बच्चा किसी भी नई चीज़ से डरता है, आने वाली परीक्षा से पहले घबराता है, या किसी भी मुश्किल स्थिति में होता है, तो थोड़ी चिंता होना तो स्वाभाविक है।
लेकिन वही जब यह चिंता लगातार बनी रहती है, हमेशा बच्चे चिंतित हो तो बच्चे के दिनचर्या, पढ़ाई, खेलकूद और खुशियों में बाधा डालने लगती है, और यह एक एंग्जायटी डिसऑर्डर का रूप ले सकती है।
स्ट्रेस (तनाव) शरीर और दिमाग की उस स्थिति को कहते हैं जब बच्चा किसी भी दबाव हो या मांग के प्रति प्रतिक्रिया करता है। थोड़ा तनाव तो बच्चे को बेहतर प्रदर्शन के लिए भी प्रेरित कर सकता है, लेकिन यही अगर लंबे समय तक बना रहे तो यह तनाव बच्चे के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों को काफी हद तक नुकसान पहुंचाता है।
बच्चों में एंग्जायटी और स्ट्रेस के लक्षण को कैसे पहचानें?
बच्चे अक्सर अपनी मानसिक समस्या को शब्दों में नहीं बता पाते है कि असल में बात क्या है बच्चे इसे शारीरिक लक्षणों या अपने व्यवहार में बदलाव के रूप में दिखाते हैं। अगर आपको ये सभी संकेत नजर आएं तो सतर्क हो जाएं।
शारीरिक लक्षण।
बार बार पेट दर्द सर दर्द कि शिकायत।
ऊर्जा की कमी थकान रहना।
भूख में कमी या बहुत ज्यादा खाना खाना।
बुरे सपने आना।
हाथ-पैर ठंडे होना या पसीना आना।
सोने में परेशानी या बहुत ज्यादा सोना
व्यवहारिक लक्षण।
स्कूल जाने से मना करना या बार-बार स्कूल से फोन आना।
रोने की आदत बढ़ जाना।
नाखून चबाना, बाल उखाड़ना, बिस्तर गीला करना जैसी आदतें वापस आना।
चिड़चिड़ापन, छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा।
अकेले रहना पसंद करना।
कम खेलना।
भावनात्मक लक्षण ।
ध्यान केंद्रित करने में परेशानी।
हर समय कुछ न कुछ बुरा होने का डर बुरा सोचना ।
नई चीज़ों से ज्यादा डर लगना।
खुद को बेकार समझना।
बिना वजह के डर लगना।
बच्चों में एंग्जायटी और स्ट्रेस कम करने के कुछ घरेलू उपाय घर में ही रहकर कैसे एंग्जायटी को कम करे।
जब आपने एंजायटी स्ट्रेस के लक्षण पहचान लिए हैं तो आईए जानते हैं इसको इस पोस्ट में के घर पर रहकर ही बच्चों के तनाव को कम कैसे करें और उन्हें मानसिक रूप से मजबूत कैसे बनाएं।
बिना जज किए सुनें।
जब बच्चा आपसे कुछ कहने की कोशिश करें तो आप उसे बीच में कोई रोक-टोक ना करें और उसकी पूरी बात सुने किसी बात को मन तो बिल्कुल भी ना करें और उनकी भावनाओं को मन्यता दें। इतना ही नहीं आप अपने बच्चों को किसी और के बच्चे से कंपेयर ना करें इससे बच्चों को काफी हद तक तकलीफ होती है और खुद भी किसी और के बच्चे को देखकर अपने बच्चों में खामी न निकले हर बच्चा अपने हिसाब से रहता है।
गोल्डन रूल।
आप अपने बच्चों को यह महसूस कराऐं की कि उनके पास एक सुरक्षित जगह है जो उनके माता-पिता जिसे वह अपनी बात बिना डरे कुछ भी कह सकता हो। चाहे वह अपनी बात हो या फिर बच्चों ने कोई गलती की है तो इसके लिए उन्हें सजा नहीं दे बल्कि उन्हें कहें कि आप खुलकर हर बात शेयर कर सकते हैं गलती करेंगे तभी सीखेंगे तो गलती करना कोई गुनाह नहीं है। और जब बच्चों को यह एहसास हो जाएगा की गलती करने से दांत नहीं मिलेगी तो उसे चिंता नहीं रहेगी बल्कि वह आपसे सारी बातें अपना दिल खोलकर शेयर करेगा।
रूटीन बनाएं।
आप अपने बच्चों की एक नियमित दिन आचार्य बनाएं और उन्हें सुरक्षा का एहसास कारण जैसे सोने जागने खाने पीने पढ़ाई लिखाई खेल सभी का टाइम टेबल बनाएं और बच्चे को पता होना चाहिए अब क्या करना है तो इससे उनकी चिंता कम होगी और वह सुरक्षित महसूस करेंगे।
स्क्रीन टाइम कंट्रोल करें।
स्क्रीन टाइम आपके बच्चों की एंजायटी को बढ़ाता है इसलिए आपको चाहिए कि आप अपने बच्चों का स्क्रीन टाइम लिमिट रखें रात को सोने से पहले मोबाइल तो बिल्कुल भी ना दे इससे बच्चों को नींद अच्छी आएगी और दिमाग शांत रहेगा।
फिजिकल एक्टिविटी को प्रोत्साहित करें।
अपने बच्चों के साथ रोजाना कम से कम एक घंटा ही सही आउटडोर गेम जरूर खेलें साथ में जैसे साइकिल चलाना डांस करना दौड़ना कूदना इन सभी चीजों से बच्चों की खूशी बढ़ती है तनाव से दूर रहते हैं और हो सके तो साथ-साथ थोड़ी एक्सरसाइज भी करना सिखाए इससे और अच्छा रिजल्ट आएगा। अगर बच्चे को क्राफ्ट बनाना पसंद है ड्राइंग पसंद है तो उनका मनपसंद काम भी उनके साथ करें से बच्चे एंजायटी स्ट्रेस से दूर रहते हैं।
माता-पिता खुद शांत और खुश रहें।
अगर बच्चे की माता-पिता घर का माहौल अच्छा बनाएंगे खुशहाल माहौल बनाएंगे तो बच्चे को लगेगा कि माहौल अच्छा है तो सब कुछ अच्छा है बच्चा माता-पिता की एनर्जी अब्जॉर्ब करता है अगर आप उसे पर सीखेंगे चिल्लाएंगे तो भी वैसे ही सोचेगा और कल होकर वह भी वैसे ही करेगा इसलिए माता-पिता को चाहिए कि घर का माहौल खुशहाल बनाएं आप शाम तो आपका बच्चा भी शांत उन्हें भी चिंता एंजायटी कम होगी।