सिंगल चाइल्ड पेरेंटिंग। एक ही इकलौती संतान को बिगड़ने से कैसे बचाएं और सही संस्कार कैसे दें?

अगर आपके घर में भी एक ही  एकलौती संतान है, तो ये सवाल आपके मन में भी आते ही होंगे। आज की जैनरेशन में ज्यादातर परिवारों में एक ही बच्चा होता है।  चाहे वह लड़का हो या लड़की इससे फर्क नहीं पड़ता वजह चाहे जो भी हो प्लानिंग हो, करियर का प्रेशर हो, या फिर शहरी जीवनशैली में सिंगल चाइल्ड फैमिली आम हो गई है। अक्सर हमारे मन में आने वाला सवाल यह है की बेटा तो एक ही है कहीं बिगड़ न जाए। क्योंकि हमारे पास बच्चा तो एक ही है तो सारा प्यार उसी पर निछावर करें तो कहीं यह प्यार उसे खराब ना कर दे वह सिंगल चाइल्ड है तो कहीं उसे अकेलापन तो नहीं लगता यह सब सोच कर हमें थोड़ी चिंता होने लगती हैं बार-बार मन में यह भी सवाल आता है कि बच्चे एक हैं तो उनकी परवरिश कैसे करें ताकि वह बिगड़े ना नहीं अकेलापन महसूस न  करें संस्कारी बने आत्मनिर्भर हो अपनी जिम्मेंदारियों से नहीं भागे। क्योंकि एक बच्चा होना किसी वरदान से काम नहीं जिन्हें एक भी बच्चे नहीं है। 




तो आईए जानते हैं इस पोस्ट में हम की सिंगल चाइल्ड पेंटिंग कैसे करें और उन्हें कैसे आप सही दिशा दिखाएं। 



सिंगल चाइल्ड पेरेंटिंग में आने वाली सबसे बड़ी चुनौती है।


सिंगल चाइल्ड पेरेंटिंगमें में आने वाली चुनौती है माता-पिता की बढ़ती उम्मीद है जो माता-पिता अपने बच्चे से ज्यादा उम्मीद लगा लेते हैं। इस वजह से बच्चे पर जिम्मेदारी का काफी बोझ हो जाता है और बच्चे अकेलापन महसूस करते हैं क्योंकि उनके साथ कोई भाई बहन नहीं है।

पेरेंट्स अपने बच्चों को ज्यादा लाड प्यार करते हैं इस वजह से वह जिद्दी  स्वार्थी भी हो जातेहै अपनी चीज किसी से शेयर नहीं करते क्योंकि उनकेआगे पीछे कोई भाई बहन नहीं है ।

लेकिन परेंट्स को हिम्मतस काम लेना है घबराने की जरूरत नहीं है सही तरीके से अगर पेरेंट्स अपने अकेल संतान कि देखभाल करें तो यह चुनौतियों पर करना उनके लिए बहुत आसान है तो आईए जानते हैं इस पोस्ट में पेरेंट्स अपनी अपनी संतान को बिगड़ने से कैसे बचाएं और कैसे सही संस्कार दें।


अपनी संतान को को अकेलापन ना होने दे।


एक बच्चा हमेशा अकेलापन महसूस करता है खास कर तब जब उसके मता-पिता कम पर जाते हैं और वह घर में अकेला हो किसी नैनी के साथ या किसी रिश्तेदार के साथ हो क्योंकि बच्चों माता-पिता का सपोर्ट सबसे ज्यादा चाहिए।

इसलिए आपको करना यह है कि आप अपने बच्चे के साथ आउटडोर गेम खेलें थोड़ा टाइम निकाल कर उनके साथ मस्ती करें पूरी एक्सरसाइज करवाएं उनके मनपसंद गेम खेलें पार्क ले जाए दूसरे बच्चों से मिलवाएं ताकि आपके बच्चे का सोशल स्किल मजबूत हो और इसके साथ आप और बच्चे दोनों का साथ में क्वालिटी टाइम भी पास होगा।


दूसरों के बच्चों से अपने बच्चे की तुलना ना करें। 


अक्सर माता-पिता ऐसी गलती करते हैं जो अपने बच्चे का कंपेयर दूसरे के बच्चों से करते हैं ऐसा तो आपको बिल्कुल भी नहीं करना है इससे बच्चे गिल्टी फील करते हैं। हमेशा उनके मन में एक डर सा बैठ जाता है कि क्या मैं गलत हूं।


अपने बच्चे को गलतियां करने दे।

जब आपके बच्चे गलती करेंगे तभी आपके बच्चे सफलता की ओर बढ़ेंगे इसलिए आप हर कदम पर उन्हें रोक के टोके नहीं जब एक बार असफलता होगी तो उसे सफलता में बदलने की बच्चा खुद कोशिश करेगा जैसे वह गिर जाए तो उसे उठा नहीं है उसे कहें खुद उठो जैसे कुछ टूट जाए तो बोले कोई बात नहीं है चलो साथ में मिलकर साफ करते हैं यह सब छोटी-छोटी बातों के लिए नहीं बच्चे को बच्चों को डांटे और अपने बच्चों को एहसास दिलाए की गलती करना कोई बुरी बात नहीं है गलती करने से ही तो इंसान सीखता है। 


कभी-कभी ना कहना भी सिखाए। 

अक्सर सिंगल पेरेंटस यह गलती कर देते हैं कि बच्चा जो मांगे वह तुरंत हाजिर कर देते हैं ऐसा बिल्कुल ना करें बच्चों की हार जीत जरूरी नहीं है पूरी करनी और अगर बच्चा कुछ मांगे और आपको वह चीज नहीं देना है बच्चा रोने लगे जमीन पर लेट जाए तो उसे यूं ही कुछ देर के लिए छोड़ दें तो बच्चे को यह एहसास होगा कि यह बेवजह हम ऐसा काम कर रहे हैं मुझे पता है मुझे नहीं मिलेगी तो बच्चा खुद वहां से उठ जाएगा और फिर वह खुद आपके पास आएगा और उसे से प्यार से  गले लगाकर समझाएं की हार जीद पूरी नहीं की जा सकती अगर हर जिद आप उसकी पूरी करेंगे तो बच्चा स्वार्थी और अहंकारी होगा क्योंकि उसे पता है कि मैं जो मांगूंगा अपने माता-पिता से वह मुझे दे देंगे।


जिम्मेदारी सौंपे।

सिंगल पेरेंट्स को चाहिए सिंगल ही क्या हर माता-पिता को यह करना है अपने बच्चों को अपनी जिम्मेदारी खुद सोप जाए अगर बच्चे छोटे-से है 2 से 5 साल के तो उन्हें अपना खिलौना समेटना आना चाहिए अपनी चीजों को इकट्ठा सही साली कैसे रखना आना चाहिए जैसे अम्मा पापा को पानी चाहिए तो बच्चे लाकर दिन इत्यादि

और जब बच्चा स्कूल जाने वाला हो 6 से 10 की उम्र में तो उन्हें अपना बैक पैक करना आना चाहिए अपना टिफिन स्कूल से आने के बाद उसे सीधा किचन में ले जाकर रखना अपनी अपनी की बोतल भरना अपना कमरा साफ करना अपनी बुक सलीके से रखना आना चाहिए यह सब जिम्मेदारी बच्चे को सौपे

पर जब बच्चा 11 प्लस का हो तो बाहर का कमकाज
 इन सब की जिम्मेदारी दी जाए और साथ में उनकी तारीफ भी कीजिए कि बच्चे को खुद में कॉन्फिडेंस आएगा। 


मूल्य और संस्कार सिखाएं। 

इकलौती संतान होने से उसे संस्कार और मूल्य सिखाना बहुत जरूरी है वह अकेला है उसके पास कोई भाई बहन नहीं है तो जो भी सीखना है वह माता-पिता को सिखाना होगा

जैसे हमेशा सच बोलना अगर कोई गलती हो जाए तो अपनी गलती एक्सेप्ट करना यह सब अपने बच्चे को सिखाएं।

बच्चों को सब्र करना भी सिखाए जैसे कुछ मांगे और तुरंत पूरी नहीं की जा सकती वह चीज इसलिए उन्हें धैर्य सीखना भी सबसे जरूरी है।

अपने से बड़ों का सम्मान करना जैसे दादा दादी नाना नानी मां चाचा चाहे कोई भी हो सब अपने से भरो का सम्मान करना और वह छोटों से प्यार करना। 

जो मिला है उसी में खुश रहना सीखने और चीजों की कद्र करना भी सिखाए ।

दूसरों की मदद करना किसी की परेशानी को समझना इन सब की सहानुभूति बच्चे में होनी चाहिए।


स्क्रीन टाइम पर कंट्रोलकरें। 


स्क्रीन टाइम टाइम टेबल के हिसाब से तय करें जैसे बच्चा 2-5 साल का है उसके लिए स्क्रीन टाइम एक घंटा काफी है लेकिन मैं अपने बेटे हुजैफ की बात करती हूं जो अभी 2.5 का नहीं है तो मैं उसे अभी तक स्क्रीन टाइम नहीं देती जीरो स्क्रीन टाइम है मेरे बेटे हजैफ की बच्चों को कोशिश करें कि आउटडोर गेम क्रिएटिविटी इन सभी बच्चों को बिजी रखें क्योंकि आज की जनरेशन बिना मोबाइल के रह नहीं सकती तो मेरा मानना है कि जब तक बच्चे बच सकते हैं मोबाइल की लत से तो क्यों ना बचाने की कोशिश करें।


उनके दोस्तों को और उनकी भावनाओं को समझे। 


जब बच्चे का कोई भाई बहन नहीं होता तो उनके दोस्त ही अपने होतेह माता-पिता को चाहिए बच्चों के दोस्त को अपने और उनकी भावनाओं को समझें बच्चों को इतना भरोसा दिलाए कि आप से वह हर बात शेयर कर सके चाहे बात कितनी भी बड़ी क्यों ना हो वह आपसे बेझिझक आकर अपनी बातें शेयर करें बच्चे और बच्चे के दोस्त और उनके माता-पिता से अपना संबंध अच्छा बनाएं  बच्चों के दोस्त उनके माता-पिता सबको अपने फंक्शन में बुलाए कभी अगर बच्चे के दोस्त अपने घर बुलाए तो आप लोग भी जाएं बच्चों को सीखाए की बेहतर दोस्त कौन होता है अपने दोस्तों की परख भी आनी चाहिए और उनके साथ व्यवहार कैसा रखें।



पूरा पोस्ट पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद।