होमवर्क कर ले बेटा बस 5 मिनट और फिर खेलने चले जाना बस थोड़ी देर होमवर्क करलो कितनी बार कहूँ अब टीवी बंद करो और पढ़ाई करने बैठो। ये सब कह कह कर आप थक चूकी है न तो यह सब कहना अब बंद कजिए
आईए इस पोस्ट में हम यह जानेंगे की बच्चों को सेल्फ स्टडी कि आदत कैसे लगाई जाए और स्कूल के होमवर्क कराने कि लड़ाई को खत्म कैसे करें।
आई इस पोस्ट में बात करते हैं कि बच्चों को सेल्फ स्टडी की आदत कैसे लगाएं।
बच्चों की जिज्ञासा को प्रोत्साहित करें।
आपके बच्चों की जिज्ञासा ही उसकी सबसे बड़ी शिक्षक है इसलिए आपको उसकी जिज्ञासा को बढ़ाना है और वह कुछ जानना चाहेगा खुद पढ़ेंगा। आपको करना क्या है उसके सवालों का जवाब दें अगर आपको जवाब नहीं पता है तो बच्चों के साथ में मिलकर सवालका जवाब ढूंढें उसे एजुकेशनल गेम्स दे विज्ञानसे जुड़े खिलौने दे और उसके क्यों के सवाल पर उसे डांटे नहीं बल्कि उसे उत्साहितकरें।
पढ़ने की आदत डालें।
जो बच्चा किताबें पढ़ता है, वह पढ़ाई से कभी भी भागता नहीं है। रोजाना पढ़ने की आदत से कॉन्सन्ट्रेशन, इमेजिनेशन और वोकैबुलरी तीनों बढ़ते हैं बच्चे में आपको रोजाना 15-20 मिनट कहानी पढ़ना उनकी रूटीन में शामिल करें बच्चे की उम्र और रुचि के हिसाब से उनके लिए किताबें लाएं।खुद भी किताब पढ़ते हुए बच्चों को दीखाए ताकि बच्चा आपकी नकल करेगा।
उसके लर्निंग स्टाइल को पहचानें।
हर बच्चा अलग अलग तरह से सीखता है कुछ बच्चे देखकर सीखते हैं कुछ सुनकर, कुछ करके। इसलिए आपको ये जानना है कि आपका बच्चा कैसे सीखता है।
उम्र के अनुसार सेल्फ स्टडी टिप्स भी हो।
2-5 साल के बच्चों को (प्री-स्कूल) में हो पढ़ाई को खेल बनाएंगे रंगों,आकृतियों, और खिलौनों से सीखाए होमवर्क 10-15 मिनट से ज्यादा न हो। ध्यान इतनी देर ही लगाता है बच्चा हर छोटी कोशिश के लिए बच्चों की की तारीफ करें। उन्हें कहानी सुनाने की आदत डालें।
6-10 साल के बच्चों को (प्राइमरी स्कूल) में डालें रूटीन बनाना शुरू करें एक फिक्स टाइम टेबल फिक्स जगह बनाएं उनकी होमवर्क करने में मदद करें, लेकिन खुद बच्चों का होमवर्क न करें। उनकी गलतियों पर धैर्य रखें। समझाएं प्यार से पर डांटें नहीं।पढ़ाई को मजेदार बनाने के लिए स्टिकर चार्ट, छोटे इनाम जरुर दें।
11-15 साल के बच्चों को (हाई स्कूल) में डालें उन्हें सेल्फ स्टडी के लिए प्रोत्साहित करें। खुद से खुद को टाइम टेबल बनाने दें।होमवर्क में तभी मदद करें जब वह आपसे मदद खुद मांगे।पढ़ाई के अलावा उनके शौक को भी सम्मान दें उनकी भावनाओं को समझे उनकी निजता का सम्मान करें। पढ़ाई के समय बीच-बीच में उन्हें टोकें नहीं।
तो यह थी कुछ बातें बच्चों में सेल्फ स्टडी की आदत कैसे डालें आई अब बात करते हैं बच्चों को स्कूल का होमवर्क करने की लड़ाई को कैसे खत्म करें।
स्कूल का होमवर्क करने की लड़ाई क्यों होतीहै।
सबसे पहले हमको यह समझना है की स्कूल का होमवर्क करने के लिए लड़ाई क्यों होती है इसे समस्या को समझेंगे तभी समाधान निकाल पाएंगे।
माता-पिता की नजर से- देखें तो माता-पिता चाहते हैं कि बच्चा तुरंत जल्दी से बैठकर होमवर्क कंप्लीट करें कंप्लीट हो कोई गलती ना हो किसी और से हम अपने बच्चों की तुलना करने लगते हैं इसमें आपका बच्चा कंफ्यूज रहता है कभी आप उससे प्यार करतें हैं कभी गुस्सा करते हैं आप सोचते हैं कि आपका बच्चा परफेक्ट हो।
अब आप जरा बच्चों की नजर से देखें।
स्कूल में 6 से 7 घंटे बिताने के बाद बच्चा थका हुआ होता है उसका मन सोने का आराम करने का रहता है पढ़ाई करने का नहीं और और जिस सब्जेक्ट में बच्चों की रुचि नहीं रहती उस सब्जेक्ट में बच्चा होमवर्क करना भी पसंद नहीं करता।
बार-बार ध्यान भटकना बार-बार ध्यान भटकना जैसे मोबाइल टीवी खिड़की के साइड है तो पंछियों की आवाज या किसी भी चीज कि किचन में कुकर की सीटी की आवाज किसी भी चीज का शोर इन सब की वजह से बच्चे का ध्यान भटकता है अगर आपने उसे डांट दिया कभी होमवर्क करते हुए तो नेक्स्ट टइम
बच्चा होमवर्क करने में कतराएगा।
होमवर्क के लिए सही टाइम चने।
हर बच्चे के अंदर अपनी एनर्जी लेवल अलग-अलग होती है कोई बच्चे स्कूल से आते ही होमवर्क बना लेते हैं और वह तरोताजा रहते हैं और कुछ सुस्त थके हुए रहते हैं तो इसके लिए आपको ही होमवर्क के लिए सही टाइम का मैनेजमेंट करना हैं
बच्चा स्कूल से आए और थका हुआ हो तो उसे आप आराम करने दे खाना खाने दे उससे बात करें कम से कम 40 45 मिनट बाद ही होमवर्क के लिए उसे तैयार करें।
जब बच्चा ज्यादा भूख हो सुस्त हो या कहीं घूमने जाने का प्लान हो ज्यादा उत्साहितह तब उसे होमवर्क के लिए न कहें।
आपको ध्यान देना है कि आपका बच्चा सबसे ज्यादा फ्री माइंड कब रहता है पढ़ाई और होमवर्क के लिए।
पढ़ाई के लिए जगह को खास बनाएं।
बच्चों की पढ़ाई के लिए एक जगह फिक्स बनाएं चाहे वह टेबल हो या क्रोम का कोई कोना हो या फिर कहीं पर भी जहां पर ना मोबाइल हो ना टीवी हो एकदम शांत माहौल हो और नहीं खिड़की हो जिससे बच्चा खिड़की से बार-बार नीचे की तरफ देखे या कुछ भी माहौल एकदम शांत होना चाहिए उसकी पसंद की कुछ चीजों को वहां पर रखिए जगह साफ होनी चाहिए हवादार होनी चाहिए उसका मनपसंद कोई पेंसिल कोई ड्राइंग या उसका नाम लिखा हुआ पेन स्टेंड।
छोटे-छोटे गोल सेट करने के साथ होमवर्क को खेले में बदल दें।
बच्चों का जो सब्जेक्ट मनपसंद है पहले उसे करने दे और उसे टाइम दें टाइमर लगाकर की इतने दिन में यह सब्जेक्ट कंप्लीट हो जाना चाहिए चलो देखते हैं तुम कर पाते हो या नहीं ऐसा कहकर उन्हें फुसलाएं और उन्हें गोल सेट करके दें एक सब्जेक्ट के होमवर्क के बाद उसे 10 मिनट का ब्रेक दें जिसमें वह टहल के आए पानी पीकर आए और खेल-खेल में बच्चे होमवर्क भी कंप्लीट कर लें पढ़ाई को मजेदार बनाना सबसे बड़ा हथियार है जब पढ़ाई को खेल-खेल में पढ़ा पढ़ाएंगे होमवर्क करेंगे तो बच्चा खुद अपने आप होमवर्क करेगा।
उनकी पसंद को प्राथमिकता देने साथ सहायता भी दें लेकिन आप खुदसहायता ना करें।
कौन से सब्जेक्ट का होमवर्क पहले करना है यह अक्सर लड़ाई का कारण बनता है क्या आप बच्चों को उनका सब्जेक्ट चुने की आजादी दिन की कौन सा सब्जेक्ट का पहला होमवर्क करनाहै अपने पसंद का सब्जेक्ट पहले करता है तो उस बच्चे का आत्मविश्वास पड़ता है और भारी सब्जेक्ट को आप बीच में करने दे उसे समय बच्चे का मन पूरा सब्जेक्ट पर कंसंट्रेट रहता है और उनकी सहायता करें बल्कि आप उनकी मदद खुद ना करें कभी-कभी अक्सर हम लोग यह गलती करते हैं कि बच्चे का होमवर्क हम लोग खुद करते हैं तो ऐसा बिल्कुल भी नहीं करना है बच्चों का होमवर्क का बच्चों को ही करने दे अगर बच्चे को कोई सवाल नहीं आता है तो उसे कई तरीके से बताएं थोड़ा बताएं पूरा हाल ना करें बच्चों ने गलत होमवर्क बनाया है तो उसे गलत ही रहने दे ताकि स्कूल में उसके टीचर उसको सही करें फिर वहां पर उसे समझाएं। मेरा यह कहना है होमवर्क में मदद करने का मतलब है सिर्फ मदद करना ना कि आप उसका होमवर्क करें इससे बच्चे में आत्मविश्वास की कमी होती है और वह दूसरे पर ही डिपेंड हो जाएंगा।
गलतियों पर डांटे नहीं।
गलती करना भी एक सीखने का हिस्सा है अगर बच्चे गलती नहीं करेंगे तो क्या हम बड़े गलती करेंगे इसलिए बच्चा अगर गलती करता है तो उसे डांटे नहीं उसे प्यार से समझाएं अगर आप उसे हर गलती पर डटेंगे तो बच्चा होमवर्क करने से डरेगा
गलती करने पर बच्चों को यह ना कहें कि वह फैलाने का बच्चा तुमसे अच्छा पड़ता है तुमसे अच्छा जानता है बल्कि उसे प्यार से समझाएं कि यहां पर कुछ गलतियां है चलो उसे सही करते हैं प्यार से समझाने से बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ता है गलती करने पर अगर डांटेंगे तो बच्चा जिद्दी बनेगा आपकी बात नहीं मानेगा।
आज की जनरेशन में स्क्रीन टाइम पर भी ध्यान रखना जरूरी है।
बच्चों को हर वक्त टीवी मोबाइल यह सब उन्हें ना दे बल्कि उन्हें पहले होमवर्क करने की अनुमति दें कि पहले होमवर्क करलो फिर आराम से हम लोग साथ में बैठकर टीवी मोबाइल देखेंगे बच्चे को स्क्रीन टाइम 40 से 45 मिनट ही दें इससे ज्यादा नहीं दे। अगर आप टीवी देख रहे हैं और आपका बच्चा होमवर्क कर रहा है तो बच्चे का मन बात करने में नहीं लगेगा इसलिए पहले आपको खुद कुछ रूल फॉलो करने होंगे क्योंकि बच्चा जो देखता है वहीं सीखता है।
पूरा पोस्ट पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद।