क्या आपके घर में भी ऐसी ही आवाजें गूंजती हैं।
बस भी करो अब मैं और नहीं सुनूंगी आपको कुछ नहीं आता आपसे कुछ नहीं होता।
क्या आप और आपके पति/पत्नी के बीच छोटी-छोटी बातों पर आपसी झगड़े भी होते हैं ज्यादातर माता-पिता तो यही सोचते हैं कि बच्चा तो अभी छोटा है वह क्या समझेगा। या हम तो सामान्य तौर पर लड़ते हैं, इससे बच्चों को क्या फर्क पड़ता है।
लेकिन सच्चाई तो यह है कि बच्चे बहुत कुछ समझते हैं। वे आपकी हर बात आपके हर चेहरे के भाव, हर टोन को नोटिस करते रहते हैं। आपके झगड़े उनके मन पर बहुत गहरे घाव छोड़ सकते हैं, जो बड़े होकर भी कभी नहीं भरते।
अगर हां आप लोग ऐसे ही छोटी-छोटी बात पर लड़ते हैं तो यह आप दोनों के बीच झगरे का मामला नहीं है ये आपके बच्चे के मन पर सीधा असर करता है।
आईए इस पोस्ट में हम यह जानेंगे कि बच्चे के सामने झगड़ने के क्या-क्या नुकसान हैं। बच्चे पर इसका क्या असर पड़ता है। और सबसे महत्वपूर्ण बात बिना झगड़े समस्याओं को कैसे आपस में सुलझाएं और बच्चे के सामने तनाव कैसे कम करें।
पति-पत्नी के आपस के झगड़े बच्चों पर कैसे असर डालते हैं?
बच्चे बहुत संवेदनशील होते हैं। वे घर के माहौल को बहुत जल्दी और गहराई से महसूस करते हैं। इस पोस्ट में कुछ प्रमुख प्रभाव बताए जा रहे हैं।
मानसिक तनाव और चिंता।
जब बच्चे के माता-पिता आपस में लड़ाई करते हैं तो बच्चे के मन में एक डर सा बैठ जाता है कि कहीं उसके मां-बाप लग तो नहीं हो जाएंगे।
प्रभाव ।
बच्चा स्कूल नहीं जाना चाहता।
बच्चों को नींद नहीं आती बुरा बुरा सपना आता है।
बच्चों में हर समय डर का माहौल बना रहता है।
बच्चा छोटी-छोटी बात पर घबरा जाता है।
व्यवहार में बदलाव आना।
कुछ बच्चे शांत और डर डर के रह जाते हैं कुछ बच्चे हर टाइम गुस्से में रहते हैं चिड़चिड़ापन होता रहता है। इन सब की वजह से बच्चों के व्यवहार में बदलाव आता है।
प्रभाव।
बच्चा खुद भी गुस्सा करने लगता है।
स्कूल में जाकर लड़ाई-झगड़ा करता है।
या फिर एकदम से चुप हो जाता है, किसी से बात नहीं करता। एक्टिविटीज में रुचि खत्म हो जाती है।
पढ़ाई पर बुरा असर।
जब बच्चे का मन माता पिता के झगड़े से परेशान रहता है तो वह पढ़ाई में मन नहीं लगाता है।
प्रभाव
पढ़ाई में अचानक गिरावट आना।
होमवर्क करने में मन नहीं लगाना।
स्कूल जाने से बचना।
सीखी हुई आदतों को दोहराना बड़े होकर।
मैं हमेशा कहा है कि बच्चे जो देखे हैं वही सीखेंगे चिल्लाना गाली देना मारपीट चीजों को तड़ना बच्चा जो देखेगा वही करेगा।
प्रभाव।
आपका बच्चा गुस्सैल स्वभाव का होजाएगा।
बड़ा होकर वह भी वही आदत को दोहराएगा जैसा आप पति-पत्नी करते हैं।
उसे एक हेल्दी रिलेशनशिप बनाने में बहुत मुश्किल होगी।
आप कैसे पहचानें कि आपके झगड़ों से आप का बच्चा प्रभावित हो रहा है या नहीं?
कई बार माता-पिता को तो यह भी पता ही नहीं चलता कि उनके झगड़ों का असर बच्चों पर हो रहा है। यहाँ कुछ संकेत दिए गए हैं इस के जरिए पता किजिए।
शारीरिक संकेत।
आपका बच्चा बार-बार सिरदर्द, पेटदर्द की शिकायत करता है।
बच्चों भूख कम लगना या बहुत ज्यादा खाना।
बच्चों में नींद न आना, बुरे सपने आना।
बिस्तर गीला करना जिस उम्र में यह आदत छूट चुकी हैं तब भी।
व्यवहारिक संकेत।
बच्चे को छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आना।
बच्चे का पहले से ज्यादा जिद करना।
बचचा स्कूल जाने से मना कर रहा है।
अपने दोस्तों से दूरी बनाना।
हर वक्त मम्मी-पापा से चिपके रहना।
भावनात्मक संकेत।
बच्चे का उदास रहना, रोना।
बच्चे का डरा-डरा रहना।
बच्चे का खुद को कमतर समझना।
बच्चे का ये कहना कि मैं अच्छा नहीं हूँ सब मुझसे नाराज़ हैं मैं बहुत बूरा हूं।
अगर आपको अपने बच्चे में यह सब सकेंत दिखें तो आप समझ जाइए कि आपके झगड़ों का असर आपके बच्चे पर हो रहा है। अब समय आ गया है कि आप अपने रिश्ते और अपने व्यवहार पर ध्यान दें।
माता-पिता को बच्चे के सामने झगड़ने से बचने के कुछ तरीके।
अपने बच्चे के सामने बात करने का तरीका बदलें।
अगर पति पत्नी के बीच कोई मुद्दा है और बच्चा वहां मौजूद है तो चिल्लाने की बजाय शांति से आपस में बात करें।
क्या करें।
अपनी आवाज नीचे रखें।
पति-पत्नी एक-दूसरे को बोलने का मौका दें।
एक दूसरे को गाली या ताने न दें।
माता-पिता बच्चे के सामने कभी न लड़ें।
जितना हो सके पति-पत्नी ये कोशिश करें कि बच्चे के सामने झगड़ा न हो।
क्या करें:
जब भी लगे कि अब बहस बढ़ेगी तो टाइम आउट लें। कहें अभी बात नहीं कर सकते हमलोग बाद में बात करेंगे इस मैटर पे।
बच्चे के सोने के बाद ही या जब बच्चा घर पर न हो, तब ही अपनी अपनी बात रखें पति-पत्नी।
अगर झगड़ा शुरू हो गया है तो तुरंत रोकें और एक अलग कमरे में जाकर बात करें।
बच्चे को दिखाएं कि आप सभी एक टीम हैं।
बच्चे को यह महसूस होना चाहिए कि मम्मी-पापा एक टीम हैं। उनके बीच मतभेद हो सकते हैं, लेकिन वे एक साथ हैं।
क्या करें:
माता पिता बच्चे के सामने एक-दूसरे की तारीफ करें।
माता पिता बच्चे के साथ समय बिताएं।
फैमिली डिनर, पिकनिक, गेम्स – ये सब में समय बिताये।
माता पिता बच्चे के सामने ही एक-दूसरे के लिए छोटी-छोटी चीज़ें करें चाय बनाना, पानी लाना खाना बनाना।
अपने बच्चे को दिखाएं कि आप माफी मांगना जानते हैं।
अगर गलती से बच्चे के सामने पति-पत्नी का आपस में झगड़ा हो गया है, तो उसे यह जरूर दिखाएं कि आप एक दूसरे से माफी मांगना जानते हैं।
क्या करें:
अपने बच्चे के सामने ही पति पत्नी एक दूसरे से से माफी मांगें।
मुझे माफ कर दो, मुझे चिल्लाना नहीं चाहिए था इस तरह से।
अपने बच्चे को बताएं हमने लड़ाई कर ली लेकिन अब हमने माफी भी मांग ली है एक दूसरे से हम एक-दूसरे से प्यार करते हैं।
बच्चे को समझाएं सुरक्षित महसूस कराएं।
अगर आपके बच्चे ने झगड़ा देख लिया है, तो उसे नज़रअंदाज़ न करें बल्कि उसे समझाएं कि क्या हुआ है।
क्या करें।
छोटे बच्चे को बताएं कि मम्मी-पापा थोड़ा नाराज़ थे इसलिए थोरी बहस हो गई लेकिन अब सब ठीक है।
अगर बड़े बच्चे हैं तो बताएं कि, कभी-कभी बड़ों के बीच भी मतभेद हो जाती हैं। लेकिन हम बात करके आपसी मतभेद को सुलझा लेते हैं। यह तुम्हारी गलती नहीं है।
अपने बच्चे को यह भरोसा दिलाना जरूरी है कि चाहे कुछ भी हो, उसके मम्मी-पापा उसे छोड़कर कभी नहीं जाएंगे।
रोजाना बच्चे को प्यार से गले लगाएं।
उन्हें कहें कि,हम तुमसे बहुत प्यार करते हैं, चाहे कुछ भी हो जाए चाहे हम कितना झगड़ ले एक परिवार है और हमेशा एक साथ रहेंगे।
बच्चे को "मीडिएटर" बिल्कुल न बनाएं।
यह माता-पिता कि सबसे बड़ी गलती है कि कभी भी अपने बच्चे को अपने झगड़े का जज या मिडिएटर न बनाएं।
क्या न करें।
बच्चों से ये सब बातें न कहें कि बोलो, पापा सही हैं या मम्मी?
तुम्हारे पापा को तो कुछ पता ही नहीं कुछ समझ नहीं है।
अपने बच्चे के सामने एक-दूसरे की बुराई करना यह सब बीलकुल न करें।
अगर झगड़ा हो गया है तो बाद में बच्चे से बात करें।
अगर गलती से बच्चे के सामने पति-पत्नी में झगड़ा हो गया है, तो उसे बाद में समझाएं।
बच्चे से क्या कहें।
बच्चे से बात करें कि तुमने हमें लड़ते देखा इसलिए हमें माफ कर देना मेरे बच्चे।
हम बड़ों के बीच कभी-कभी किसी बात को लेकर बात बन नहीं पाती तो थोरी बहस हो गई लेकिन हम एक-दूसरे से बहुत प्यार करते हैं।
मेरे बच्चे यहां तुम्हारी गलती नहीं है।
हमने अपनी बात कर ली है लेकीन अब सब ठीक है।
एक-दूसरे की जरूरतों को समझेते हूए माहौल अच्छा बनाएं।
ज्यादातर झगड़े तो इसलिए होते हैं क्योंकि हम एक-दूसरे की जरूरतों को नहीं समझते हैं
क्या करें।
एकसाथ बैठकर एक-दूसरे की जरूरतों के बारे में आपस में बात करें।
क्या चीज़ आपको परेशान करती है? क्या चीज़ आपको खुश करती है?
पति-पत्नी बिना जज किए एक-दूसरे की बात सुनें।
छोटी-छोटी चीज़ों में एक-दूसरे का साथ देते हुए माहौल को सकारात्मक बनाएं
घर में सिर्फ झगड़े नहीं, बल्कि हंसी-खुशी से भरापुरा परिवार भी होनी चाहिए।
सब साथ में कोई कॉमेडी मूवी देखें ले।
छोटी-छोटी सफलताओं कोअचछे से सेलिब्रेट करें।
अपने परिवार के साथ पुरानी यादों को ताजा करें।
गुस्सा आए तो स्ट्रेस रिलीज के तरीके खोजे।
गुस्सा आना तो एक नेचुरल है, लेकिन उस गुस्से को अपने बच्चे के सामने रिलीज करना सही नहीं है। अपने गुस्से को रिलीज करने के लिए दूसरे तरीके अपनाएं।
क्या करें।
आप वॉक पर चले जाएं।
किसी कमरे में जाकर गहरी सांस लें।
अपनी भावनाओ को एक कागज पर लिखें।
अपने किसी दोस्त से बात करें।
आप एक्सरसाइज या मेडिटेशन करें।
कपल्स काउंसलिंग लेने में संकोच बीलकुल न करें।
कपल्स काउंसलिंग लेने में संकोच न करें तो अच्छा है।
अगर आप पति-पत्नी के आपस के झगड़े बहुत ज्यादा हो रहे हैं और आपलोग झगरे खुद सुलझा नहीं पा रहे, तो कपल्स थेरेपी या काउंसलिंग लें।
यह कमजोरी नहीं है, आपकी बल्कि अपने रिश्ते और अपने बच्चे के लिए एक समझदारी भरा कदम है।
पूरा पोस्ट पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद।