क्या आप भी इन दो बातों के बीच उलझे हुए हैं. एक तरफ हम चाहते हैं कि हमारा बच्चा अंग्रेजी से पारंगत हो और आज के जमाने में अंग्रेजी को बहुत महत्व दिया जाता है। वही दूसरी तरफ, हम ये चाहते हैं कि हमारा बच्चा अपनी मातृभाषा (हिंदी) से भी जुड़ा रहे। अपने दादा-दादी नाना-नानी से बात कर सके, और अपनी जड़ों को न भूले।
तो सही तरीका क्या है?
क्या बच्चा एक साथ दो भाषाएं सीख सकता है?
क्या इससे बच्चों को कन्फ्यूजन नहीं होगा?
यह सभी सवाल हमारे दिमाग में घूमते रहते हैं। तो आईए जानते हैं इस पोस्ट में हम की बच्चों को दो भाषाएं अंग्रेजी और हिंदी कैसे सिखाएं उसे सीखने के क्या फायदे हैं ।
बिलिंगुअल पेरेंटिंग क्या है?
बिलिंगुअल पेरेंटिंग का क्या मतलब है मतलब ये है कि बच्चे को दो भाषाओं के बारे में एक साथ पढ़ाना और सिखाना। यानी बच्चा बचपन से ही दो भाषाओ को सुनता समझता और बोलता है।
बिलिंगुअल होने का मतलब ये नहीं है कि बच्चा दोनों भाषाओं को एक जैसी धाराप्रवाह में बोलता हो। यह भी हो सकता है कि बच्चे कि पकड़ एक भाषा थोड़ी कम हो। लेकिन बच्चे दोनों भाषाओं को समझते है और दोनों में बातचीत कर सकते है।
हमारे भारत में ज्यादातर बच्चे बिलिंगुअल ही होते हैं, क्योंकि घर में मातृभाषा है (हिंदी, मराठी, गुजराती आदि) और स्कूल में अंग्रेजी होती है।
बच्चों को दो भाषा को सिखने के क्या फायदे हैं।
याददाश्त तेज और दिमाग का विकास बेहतर होता है।
दो भाषाओं के शब्दों और नियम को याद रखने से बच्चे की याददाश्त तेज होती है और दीमाग का विकास ज्यादा एक्टिव होता है। बच्चों को दो भाषाएं सीखने से दिमाग की प्रॉब्लम सॉल्विंग और क्रिटिकल थिंकिंग की क्षमता भी बढ़ती है।
बच्चे काआत्मविश्वास बढ़ता है।
जो बच्चा दो भाषाओं में बात कर सकता है, वह बच्चे कहीं भी किसी से भी बात करने में कम्फर्ट महसूस करता है।
दूसरी संस्कृति को समझने की क्षमता।
हिंदी सीखकर बच्चा अपनी संस्कृति, कहानि और कविताओं से जुड़ता है। वही अंग्रेजी सीखकर वह दुनिया से जुड़ता है।
करियर के मौके बढ़ते हैं।
आज के दौर में दो या दो से अधिक भाषाएं जानना एक बहुत बड़ा स्किल है। जो जान गया वो राजा है इतना ही नहीं भविष्य में बच्चे के लिए नौकरी और बिजनेस के कई दरवाजे भी खुलते हैं।
अपने बच्चों को हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं को सिखाने के कुछ आसान तरीके हैं।
एक पेरेंट एक भाषा सिखाएं।
यह सबसे आसान और सरल तरीका है खासकर छोटे बच्चों के लिए।
एक पेरेंट हमेशा बच्चे से हिंदी में बात करे।
तो दूसरा पेरेंट हमेशा बच्चे से अंग्रेजी में बात करे।
इससे बच्चे को दोनों भाषाओं में फर्क आसानी से समझ में आएगा।
पापा इंग्लिश में बात करते हैं तो मम्मी को हिंदी में बात करना है।
दोनों भाषाओं में प्रतिदिन कहानियां सुनाएं।
कहानियां हर बच्चे को भाषा सिखाने का सबसे आसान और अच्छा जरिया माना हैं।
एक दिन हिंदी की कहानी और एक दिन अंग्रेजी की कहानी सुनाएं।
कहानी सुनाते समय एक्सप्रेशन और एक्शन का भी इस्तेमाल जरूर करें।
बच्चे को कहानी का कुछ हिस्सा खुद सुनाने का मौका दें।
रात में सोते समय बच्चे को कहानी सुनाने की आदत जरूर डालें। जैसे हिंदी में पंचतंत्र की कहानियां नर्सरी राइम्स इत्यादि और अंग्रेजी में Panchatantra in English, कि कोई भी जैसे कि Dr. Seuss, The Very Hungry Caterpillar इत्यादि।
घर पर एक भाषा व बाहर दूसरी भाषा का नियम।
घर में हिंदी बोलें। दादा-दादी, नाना-नानी, व परिवार के सभी सदस्यों से बच्चे को हिंदी में बात करने दे।बच्चे को अपने दादा-दादी के साथ हिंदी में बात करने को प्रोत्साहित करें।
दादा-दादी उसे हिंदी में कहानियां सुनाएं और पुरानी बातें बताएं।
इससे बच्चे की हिंदी तो सुधरेगी ही साथ साथ में वह अपनी जड़ों से भी मजबूत से जुड़ेगा।
बच्चे को कहे कि वह स्कूल और बाहर दोस्तों व टीचर्स से अंग्रेजी में बात करें।
इससे बच्चा दोनों भाषाओं के लिए अपना एक अलग स्थान बना लेता है।
रोजमर्रा की चीजों के नाम बच्चे को दोनों भाषाओं में सिखाएं।
घर में जो भी चीजें हैं उनके नाम बच्चे को हिंदी अंग्रेजी दोनों में बताएं।
यह पानी है Water
यह चाय है Tea
यह कुर्सी है Chair
यह सुरज है Sun
यह चांद है Moon
यह आम है Mango
जब बच्चा कोई चीज मांगे, तो उस चीज का नाम बच्चे को दोनों भाषाओं में बताएं और कहने को कहें। इतना ही नहीं बच्चे कि उम्र के अनुसार किताबें लाएं ।
इंग्लिश कि तस्वीर वाली किताब अलग और हिन्दी कि अलग तस्वीर कि।
बच्चों को साथ में लेकर तस्वीर दिखाएं।
जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होने लगे उसे कहानी सुनाएं और कहानियां पढ़ने आने की भी कोशिश करें।
बच्चे के लिए फ्लैश कार्ड्स बनाएं।
घर में दोनों भाषाओं के फ्लैश कार्ड्स बनाएं।
एक तरफ हिंदी में शब्द लिखें तो दूसरी तरफ अंग्रेजी में लिखे।
साथ में तस्वीर भी लगाएं फ़्लैश कार्ड कि।
रोजाना 10 -15मिनट कार्ड्स को दिखाएं।
और अपने बच्चे से पूछें इसे हिंदी में क्या कहते हैं?
अंग्रेजी में क्या कहते हैं ?
अगर बच्चे ने गलत बोला तो गलतियों को नज़र अंदाज करें सुधारें नहीं तुरंत।
जब बच्चा दो भाषाओं को मिलाकर बोलता है तो कुछ न कुछ गलती होगी तो उसे तुरंत न टोकें।
उसकी बात को स्वीकार करें और सही तरीके से दोहराएं ।
इससे बच्चा सही रूप से सीख जाएगा लेकिन उसे बात करने का हमेशा आत्मविश्वास बना रहेगा।
कभी भी अपने बच्चों को गलत बोल रहे हो। ये सब ठीक नहीं है ऐसा बिल्कुल न कहें।
यात्राओं और बाहर जाने का पुरा फायदा उठाएं।
बच्चे बाहर जाकर ही नई चीजें देखता है समझता और नए शब्द सीखता है।
बच्चों को चिड़ियाघर जरुर ले जाएं वहां जानवरों के नाम को हिंदी और अंग्रेजी दोनों में बताएं।
बच्चों को बाजार ले जाएं वहां सब्जियों, फलों और चीजों के नाम दोनों भाषाओं में बताएं।
बच्चों को पार्क में ले जाएं पेड़ (Tree) है। फूल (Flower) घास (Grass) है।
हमेशा सकारात्मक माहौल बनाएं व गलतियों के लिए बिल्कुल न डांटें।
भाषा सीखते समय बच्चा ही गलतियां करेगा न कि हम और आप यह सामान्य है पर उन्हें डांटना बिल्कुल नहीं है।
गलती पर ये न करें कि आप डांटे आप यह कहें कि अरे वाह तुमने पुरी कोशिश की ऐसे ही कोशिश करो।
उसे धीरे-धीरे सही तरीका बताएं।
कभी भी दूसरों के सामने अपने बच्चे की गलती न निकालें।
याद रखें डांट से बच्चा भाषा सीखना बंद कर देगा उसे लगेगा हम बेकार है वही अगर प्यार करे तो प्यार से प्यार से सीखेगा।
पूरा पोस्ट करने के लिए आपका धन्यवाद।