बच्चों के स्टेज फियर और शर्मीलेपन को कैसे दूर करें ?कॉन्फिडेंट बच्चा बनाने के कुछ आसान तरीके।

क्या ये डायलॉग आप भी कहते हैं अपने बच्चे से कि बेटा स्कूल के फंक्शन में कविता सुना दो जाकर ? क्या आपका बच्चा यही कहता है नहीं मुझे बहुत डर लगता है।
कया आपका बच्चा बस घर में बातूनी है बाहर कि दुनिया से स्टेज पर जाने से डर लगता है बाहर जाकर शांत हो जाता है।

स्टेज फियर और शर्मीलापन हर एक बच्चों में है ये बहुत आम  समस्या है। हर बच्चा किसी न किसी हद तक इस दौर से गुजरता है। लेकिन अगर इस समस्या को सही समय पर सुधारा नहीं गया, तो यह आदत बच्चे के आत्मविश्वास को काफी हद तक प्रभावित कर सकती है हो सकता है बड़े होकर भी यह आदत उसके साथ रह सकती है।

हम माता-पिता के लिए एक अच्छी खबर यह है कि स्टेज फियर और शर्मीलापन एक आदत है जिसे बदला भी जा सकता है। सही पेरेंटिंग टिप्स, धैर्य और प्यार से अपने बच्चे को एक कॉन्फिडेंट बच्चा जो बिना डरे अपनी बात रखने वाला इंसान बना सकते हैं।

तो इसलिए  इस पोस्ट में हम यह जानते हैं कि अक्सर बच्चों में स्टेज फियर क्यों होता है शर्मीले बच्चों को कैसे पहचाने इतना ही नहीं कॉन्फिडेंट बच्चा बनाने के कुछ आसान तरीका भी जानें।

स्टेज फियर और शर्मीलापन क्या है?

स्टेज फियर में जब बच्चा स्टेज पर जाने वाला हो या स्टेज पर हो लोगों के सामने तब बच्चे को बोलने परफॉर्म करने या कुछ पेश करने से डरता हो इस दौरान उसका दिल तेज़ धड़कता है, पसिना आता है हाथ-पैर कांपने लगता है आवाज़ रुक जाती है या वह बोलते-बोलते कुछ भूल जाता है। तो इसे ही स्टेज फेयर कहते हैं ।

शर्मीलापन वह है जब बच्चा नए लोगों से मिलने या नई जगह पे जाए तो नई चीज़ें करने में संकोच करता है। वह दूसरों से आँखें नहीं मिलाता बच्चा छुप जाता है या पीछे खड़ा हो जाता है इसे ही शर्मीलापन कहते हैं।

आईए जानते हैं, इस पोस्ट में कि बच्चे को स्टेज फियर और शर्मीलापन क्यों होता है? और इसके क्या कारण है।

गलती होने का डर।

बच्चे को डर हो जाती है कि कहीं वह कुछ गलत न बोल दे, कोई शब्द भूल न जाए, या लोग उसका मजाक न बनाएं उसपर कहीं कोई हँसें नहीं यह सब गलती होने का बच्चों को डर रहता है।

पहले का कोई बुरा अनुभव।

अगर पहले कभी बच्चे ने स्टेज पर कुछ कहा हो या कोई परफॉमेंस किया हो और उसका मज़ाक उड़ाया गया हो या उसे डांट पड़ी हो तो वह दोबारा वह अनुभव नहीं लेना चाहता है इसलिए वह  स्टेज पर जाने से डरता है,और गलती होने का डर सताता है।

 पेरेंट्स की ज्यादा उम्मीदें।

 माता-पिता जब अपने बच्चे से बहुत ज्यादा उम्मीद करते हैं। कि तुम बहादुर हो तुम्हें सबसे अच्छा करना है। तुम ही स्टार हो। स्टार बनना है इस परफॉमेंस का तो बच्चे पर काफी दबाव बढ़ता है और वह डरने लगता है।

दूसरे बच्चे से तुलना करना।

 दूसरे के बच्चों से अपने बच्चे की तुलना करने से बच्चे का आत्मविश्वास टूटता है। 

 माता-पिता का स्वभाव।

अगर बच्चे के माता-पिता खुद शर्मीले हैं, पार्टियों में जाने से बचते हैं, नए लोगों से मिलने में हिचकिचाहट व संकोच करते हैं, तो बच्चा भी वही सीखता है। बच्चों के लिए माता-पिता का स्वभाव अच्छा रहना जरूरी है।

अब बारी आती है कि कैसे पहचानें कि हमारा बच्चा स्टेज फियर या शर्मीलेपन से गुजर रहा है?

स्टेज फियर के समय शारीरिक लक्षण देखें।

 जैसे हाथ-पैर कांपना।

जैसे दिल का तेज़ धड़कना।

 जैसे पसीना आना।

जैसे मुंह सूखना, आवाज़ रुकना।

जैसे पेट दर्द या सिर दर्द की शिकायत।

जैसे बार-बार बाथरूम जाना।

शर्मीलेपन के व्यवहारिक लक्षण।

जैसे नए लोगों से आँखें नहीं मिलाना।

जैसे माता पिता के पीछे छुप जाना।

जैसे किसी पार्टी या फंक्शन में जाने से मना करना

जैसे स्कूल में सवाल-जवाब नहीं करना।

जैसे क्लास में नाम बुलाने पर डर सहम सा जाना।

आईए अब जानते हैं इस पोस्ट में की कॉन्फिडेंट बच्चा कैसे बनाएं।

बच्चे को बड़े स्टेज पर तुरंत न भेजें  छोटी शुरुआत करें।

 ये स्टेज फियर धीरे-धीरे सीढ़ी चढ़ने जैसा है आप चाहेंगे कि एक दिन में सब सही हो जाए पर ऐसा नहीं है।। एक दिन में स्टेज फियर खत्म नहीं होता।

आप क्या करें।

अपने घर पर परिवार के सामने कुछ सुनाने दें जैसे मम्मी-पापा, दादा-दादी ताई फुआ चाचा मामा बुआ।

बच्चे के स्कूल में छोटे या ग्रुप में उसके क्लास के कुछ दोस्तों के साथ।

या फिर पुरी क्लास के सामने।

बच्चे के स्कूल के फंक्शन में स्टेज पर।

धीरे-धीरे साथ निभाए जल्दबाजी न करें।


बच्चे की हर छोटी कोशिश की तारीफ करें।

अपने बच्चे कि हर छोटी कोशिशों को सेलिब्रेट करें उसकी तारीफ करें।

आप क्या करें।

आज बच्चे ने घर में दादी के सामने कविता सुना दी  वाह, मेरे बच्चे बहुत अच्छा!

कल उसने अपने क्लास में हाथ उठाकर सवाल पूछ लिया  शाबाश मेरे बच्चे बच्चे कि तारीफ करें!

बच्चे से कहे कि तुमने बहुत अच्छी कोशिश  तुमहरीआवाज़ बहुत साफ़ थी तुमने  तो कमाल कर दिया बिना रुके पूरी कविता सुना दी।

बच्चे को कुछ सिखाने के लिए जरुर कहें!

जब भी बच्चा आपको कुछ सिखाता हो या सिखाने कि कोशिश करेगा तो उसका आत्मविश्वास बढ़ता है।

आप क्या करें!

अरे वाह, तुम्हें तो यह गेम बहुत अच्छा आता है, क्या मुझे सिखाओगे?

सुनो मेरे बच्चे तुमने ड्रॉइंग क्लास में जो सीखा, वो मुझे भी सिखाओ।

एक काम करो तुम टीचर बनो और मैं स्टूडेंट बनता हूँ, चलो अब मुझे पढ़ाओ।

 जब बच्चा आपको कुछ सिखाता है, तो उसे लगता है कि उसमें वाकई कुछ खास बात है।

अपने बच्चे पर दबाव न डालें!

अपने बच्चे के साथ जबरदस्ती न करें तुम्हें परफॉर्म करना ही होगा। नहीं किया तो मैं नाराज़ हो जाऊंगी" जाऊंगा ,ऐसा कभी न कहें इससे बच्चे के दीमाग पे दबाव पड़ता है।

आप क्या करें!

 बच्चे के साथ जबरदस्ती न करें। उसकी मर्जी का सम्मान करें।
ठीक है जब तुम तैयार हो जाओ, तबही परफॉर्म करना। मैं तुम्हारा इंतज़ार करूंगा ,करूंगी।

अगर जबरदस्ती किए तो जबरदस्ती करने से बच्चे का डर और बढ़ता है।

बच्चे कि गलतियों को सामान्य बनाएं।

अपने बच्चे को बताएं कि गलतियाँ करना कोई गुनाह नहीं है ये बिल्कुल नॉर्मल है। गलतियां सबसे होती है।

आप क्या करें!

बच्चे से कहे कि देखो बच्चे मैंने भी अपनी लाइफ में  न जाने कितनी गलतियाँ की हैं।

कोई भी इंसान परफेक्ट नहीं होता। देखो सबसे बड़े कलाकार भी गलतियाँ करते हैं।

गलती करने से कुछ भी नहीं होता, लोग थोरी देर के लिए हँसेंगे और बातें भूल जाएंगे।

आप खुद की गलती सुनाएं बच्चे को  कि कल मैंने खाना बनाते समय नमक ज्यादा डाल दिया था, लेकिन हमने मजाक उड़ाया और आगे बढ़ गए। ठीक इसी तरह गलती से ही सब मिलता गलती करेंगे तभी तो सिखेगें।

पहले से रिहर्सल करवाएं।

बच्चे का जितना अभ्यास करेगा उतना ही आत्मविश्वास बढ़ेगा उसमें।

आप क्या करें!

अगर बच्चे को स्टेज पर कोई कविता सुनानी है, तो पहले उसे घर पर 10-15 बार रिहर्सल  जरूर कराएं।

बच्चे से कहे शीशे के सामने खड़े होकर बोले। इससे बच्चा खुद को देख सकता है और अपनी एक्सप्रेशन भी देख सकता है।

रिहर्सल को मजेदार और रोमांचक बनाने के लिए कभी आप दर्शक बनें, कभी बच्चा आपको सिखाए।

 मोबाइल पर वीडियो रिकॉर्ड करके दिखाएं इससे बच्चा खुद अपनी गलतियाँ भी देख सकता है। गलतियां सुधार सकता है।

डीप ब्रीदिंग और रिलैक्सेशन होना सिखाएं।

गुस्से की तरह स्टेज फियर के लिए भी ब्रीदिंग एक्सरसाइज़ बहुत कारगर है।

आप क्या करें!

बैलून ब्रीदिंग सिखाएं जैसे कि गहरी सांस लें जैसे गुब्बारा फुला रहे हैं, और धीरे-धीरे छोड़ें।

बच्चे को स्टेज पर जाने से पहले 2-3 बार ब्रीदिंग  जरुर कराएं।
दिल की धड़कन को कंट्रोल करता है और नसों को शांत करता है।

अपने बच्चे की शर्म को स्वीकार करें। गलत न बताएं।

बच्चे को शर्मीला बेवकूफ भौदुं कहकर लेबल न करें। इससे बच्चों को लगता है कि उसमें कोई कमी है।

आप क्या करें!

आप कभी भी दूसरों के सामने यह न कहें ये बहुत शर्मीला है डरपोक है", कुछ नहीं बोलता।

अपने बच्चे कि शर्म को उसकी पर्सनैलिटी का हिस्सा बताएं  तुम सोच-समझकर बात करते हो, ये बहुत अच्छी बात है।

बच्चे को बताएं कि दुनिया में तरह-तरह के लोग होते हैं कुछ बहुत ज्यादा बोलते हैं, कुछ कम। दोनों अपने अपने तरीके से सही हैं।

बच्चे को नई नई जगह पर ले जाएं।

शर्मीले बच्चे अक्सर नई जगहों पर जाने से से डरते हैं।

आप क्या करें!

अपने बच्चे को पार्क मॉल, पिकनिक हो या फिर म्यूज़ियम, नए रेस्टोरेंट जू हर जगह ले जाएं।

शुरू शुरू में बच्चे के साथ रहें, फिर धीरे-धीरे दूरी बनाएं।

उसे नए लोगों से मिलवाएं  बच्चे के साथ जबरदस्ती न करें पहले आप खुद मिलें फिर बच्चे को साथ ले जाएं, ज्यादा एक्सपोजर से डर बच्चे का अपने आप कम होता है।

बच्चे के स्कूल टीचर से संपर्क करें!

बच्चे का स्टेज फियर और शर्मीलापन सिर्फ आपको ही नहीं दीखता बल्कि उसके स्कूल में भी दिखता है।

आप क्या करें!

आप बच्चे के टीचर से बात करें और टीचर को बताएं कि बच्चा घर पर कैसा है।

टीचर से गुजारिश करें कि वह बच्चे को छोटे-छोटे मौके जरुर दे क्लास में सवाल पूछना, खरे होकर ब्लैकबोर्ड पर  कुछ लिखना, मॉर्निंग असेंबली में सब का नाम पुकारना।

बच्चों के लिए टीचर का सपोर्ट बहुत काम आता है, इसलिए टीचर से अनुरोध करें कि बच्चे पर थोरा ध्यान दें।


पुरा पोस्ट पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद!