बच्चों को पैसे की वैल्यू सिखाने के तरीके। उन्हें पॉकेट मनी कब और कैसे दे?

 अक्सर बच्चों को लगता है कि पैसे तो एटीएम से निकल आते ही हैं। पर उन्हें यह तो नहीं पता कि पैसा कमाने के लिए  कितनी मेहनत करनी पड़ती है कितनी बचत करनी पड़ती है, और सोच समझदारी से खर्च करना पड़ता है। बच्चों का क्या है वह तो बस अपनी डिमांड पूरी करवाने पे लगे रहते हैं  मम्मी मुझे टॉय चाहिए गेम्स चाहिए पापा मुझे चॉकलेट चाहिए आइसक्रीम चाहिए सभी दोस्तों के पास यह है वह है मुझे भी चाहिए।


आईए जानते हैं इस पोस्ट में की बच्चों को पैसे की वैल्यू कैसे सिखाएं और पॉकेट मनी उन्हें कब से दे।

सबसे पहले तो बच्चों को यह समझाएं कि पैसा क्यों कमाना जरुरी है और कैसे कमाया जाता है और कैसे सोच समझदारी से खर्च करें। 

खुद का उदाहरण पेश करें। 

बच्चे तो वही करते हैं जो वह देखते आते हैं अगर आप पैसे को लेकर खुद लापरवाह रहेंगे तो आपके बच्चे भी वैसे ही लापरवाह रहेंगे पैसे को लेकर आपको ही अपने बच्चों को पैसे की वैल्यू सीखना है तो आप क्या करें की बच्चों को वैल्यू समझ में आए ।

आप बच्चों के सामने बजट बनाएं और उन्हें बताएं कि वह किस किस चीज पर खर्च करने वाले हैं या फिर कितना खर्च हो गया है उन सब का बजट आप लिख रहे हैं किसी भी से से सेल या डिस्काउंट से सामान ले तो बच्चों को जरूर बताएं कि इसमें कितना मुनाफा हुआ है और कितना खर्च हुआ है और एक नोट बनाकर सबका हिसाब रखें। 

जरूर और चाहत का फर्क समझाएं। 

हमें बच्चों को यह समझना जरूरी है की जरूरत अलग होती है और चाहत अलग होती है जैसे स्कूल यूनिफॉर्म जरूरी है नया बैग या नहीं टिफिन वह एक चाहत है जैसे आपको रोटी दाल जरूरी है तो चिप्स कोलड्रिंक आपकी चाहत हैं। बच्चों को यह समझना जरूरी है की हर चीज खरीदना जरूरी नहीं है कुछ चीज बस चाहत ही रहती है। बच्चों को कुछ पैसे दे कि वह अपनी चाहत पूरी करें और आप उनकी जरूरत पूरी करें।

बजट बनाना सिखाएं। 

बड़े बच्चों को जैसे 10 साल प्लस के बच्चों को बजट बनाना आना चाहिए उन्हें सीखना है।
एक कॉपी और पेन दे और कहें कि उसमें वह अपना बजट का खर्च लिखे जो आप उसे पॉकेट मनी देंगे उसे पैसे देने से पहले महीने के स्टार्ट में ही पूछ ले कि वह कितना खर्च करना चाहता है और किस-किस चीजों पर और महीने के आखिर में बचत और बजट दोनों का मिलान करें कहां खर्च हुआ कहां क्या हुआ। 

बचपन से ही उसे गुल्लक की आदत डालें।

बच्चा जब समझने वाला हो जाए 5 साल का हो जाए तो आप उसे एक गुल्लक ला कर दें हर हफ्ते थोड़ा पैसा बच्चों को दे और उसे कहें कि वह उसे गुल्लक में डालें और गुल्लक तभी खुले जब गुल्लक भर जाए वरना गुल्लक ऐसे नहीं खुलता है गुल्लक तो बच्चों का पैसा बचाने का सबसे पुराना तरीका है और यह सबसे असरदार भी है जब गुल्लक भर जाए तब बच्चे के साथ मिलकर गुल्लक को खोले और साथम मिलकर बच्चों पैसे गिने औरउनसे पूछे तुम्हें क्या लेना था जिसके लिए तुमने यह पैसा जमा किया है। फिर वह पैसे उसे चीज पर खर्च करने दे जिसके लिए वह पैसा जमा किया है इसमें बच्चों को बचत का रिकॉर्ड दिखेगा कि उसने क्या किया। 

गलतियां करने दे  उन्हें बचाए नहीं।

यह सबसे मुश्किल और सबसे जरूरी काम है कि जब बच्चा फिजूल खर्च करता है तो उन्हें फिजूल खर्च करने द
 उसके पास जितना भी पैसा है वह एक ही दिन में खर्च कर ले आइसक्रीम खाकर आप उसे करने दे बिल्कुल जब बच्चा अगले दिन में दोस्तों के साथ जाए और आइसक्रीम खाने का मन करे या फिर कहीं और कुछ खाने का मन करे तो आप उसे समझाएं कि मुझे मालूम है कि तुम्हें चॉकलेट आइसक्रीम खानी है पर मैंने जो तुम्हें पैसे दिए थे वह एक सप्ताह के हिसाब से दिए थे तो तुमने एक दिन में खर्च किया तो अब नेक्स्ट वीक पॉकेट मनी मिलेगी तो उसे तुम आइसक्रीम या चॉकलेट खा सकते हैं बिना प्लानिंग पैसे खर्च करने का यहीनतीजा होता है उसे यह सबक जिंदगी भर याद रहेगा।

खरीदारी में बच्चे को साथ ले जाएं।

जब आप बाजार जैन तो अपने बच्चों को साथ जरूर ले जाएं उन्हें भी दिखाएं कि आप खरीदारी कैसे करते हैं।चीजों की कीमत पूछे और बच्चे को भी पछने दें दो-चार चीजों की कीमत पछे और उनकी तुलना करें और उन्हें बताएं कि कौन सस्ती है। और कौन महंगी है और किसकी क्वालिटी कैसी है। कुछ चीज बच्चों को खरीदने दे उन्हें ही पैसा देने दे और पैसे वापस लेने दे चीज लेने दे।बिल का सामान चेक करना सिखाएं।

पैसे और मेहनत के बीच का रिश्ता समझाएं। 

बच्चों को तो अक्सर लगता है पैसा तो एटीएम से आता है बैंक से आता है या फिर अम्मा पापा के बटुए से लेकिन बच्चे को यह समझना और समझना जरूरी है कि पैसा कमाने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है ।

आप अपने बच्चों को बताएं कि आपका काम क्या है कितने घंटे काम करते हो कब जाते हैं और कब आते हैं।

आप उन्हें बताएं कि पैसे देने से पहले टैक्स बिल राशन स्कूल फीस इन सभी में भी पैसा लगता है।

बच्चों का बैंक अकाउंट खोलें। 

10 साल से ऊपर के बच्चे का बैंक अकाउंट खुल जाता है कई बैंकों में तो आप बच्चे का बैंक अकाउंट जरूर खोलें।

बच्चों को खुद पैसा जमा करने दे खुद निकलने दे बस आप निगरानी करें। 

ब्याज और इंटरेस्ट का कॉन्सेप्ट समझाएं।

तो यह थी कुछ बातें। बच्चों को पैसे की वैल्यू सीखाने के तरीके आईए जानते हैं किस उम्र में बच्चों को कितनी पाकेट मनी देनी चाहिए।



उम्र के अनुसार पॉकेट मनी दें।

4 से 6 साल के बच्चे को नोट और सिक्के की पहचान कराएं 

गुल्लक की आदत डालें।

रोटी दूध यह सभी जरूरत है और चाहत में आइसक्रीम चॉकलेट आता है। जरूर और चाहत की शुरुआत करें। 

6 से 7 साल के बच्चे को हफ्ते में 10 से ₹20 रुपए दे साथ में एक गुल्लक भी दें।

8 से 10 साल के बच्चे को हफ्ते में₹100 दे और खर्च करने दे निगरानी रखें कि वह कहां खर्च कर रहा है। 

11 से 13 साल के बच्चे को हफ्ते में 200 ₹300 दे और बजट बनाने को कहें।

14 से 16 साल के बच्चे को हफ्ते में 500 ₹800 दे और उनका एक अपना बैंक अकाउंट खोल दें।

17 + में पार्ट टाइम काम के लिए प्रोत्साहित करे पॉकेट मनी के साथ जिम्मेदारी  बढ़ाएं

नोट यह एक एग्जांपल है आप अपनी आर्थिक स्थिति के अनुसार ही अपने बच्चों की पॉकेट मनी फिक्स करें।

पॉकेट मनी कैसे दें नियम और तरीके।

नियमित दिन और तरीके के साथ पॉकेट मनी दें।

एक हफ्ता या मासिक पॉकेट मनी और जरूरत पर निर्भर करता है छोटे बच्चों को हफ्ता दे सकते हैं और बड़ों को महीने में तो इसके लिए आपको एक दिन या फिर 1 तारीख तय करनी है जैसे रविवार को या किसी महीने की 1 तारीख को उन्हें पॉकेट मनी दें। हर बार उन्हें बिना मांगे पॉकेट मनी दे इससे बच्चों को भरोसा होगा आप पर।

एडवांस पॉकेट मनी ना दे रकम तय और स्थिर रखें। 

यह सबसे जरूरी नियम है की बच्चों ने अगर सारा पैसा खर्च कर लिया है और उसे कुछ खाना है आइसक्रीम खाना है या कुछ भी तो बच्चे अगर पैसे मांगे तो आप उन्हें एडवांस पैसे ना दें तभी बच्चा जो गलती किया है पैसे खर्च करने की उसके बारे में सोचेगा और उसकी की गई गलती से उसे सीखने दे और इंतजार करने को काहे की अगले सप्ताह में मिलेगी तो तुम आइसक्रीम खा सकते हैं यह सबक उसे जिंदगी भर याद रहेगा कि पैसे की प्लानिंग कैसे करनी है। पॉकेट मनी की रकम हमेशा फिक्स ही रखें एक्स्ट्रा पैसे ना दे बच्चा चाहे कितनी भी जिद करें बच्चों के साथ मिलकर बैठकर एक नियम बनाएं हर उम्र और जिम्मेदारी के हिसाब से उन्हें पॉकेट मनी मिलती है।

आपके काम पर नजर रखें नियंत्रण नहीं। 

पैसा देने के बाद बच्चे पर निगरानी करें कि बच्चा पैसा कहां खर्च कर रहा है अगर वह सही जगह खर्च कर रहा है तो ठीक है और अगर कोई किसी गलत जगह खर्च कर रहा है तो उसे डांटे नहीं प्यार से समझाएं जबरदस्ती ना करें। 
उन्हें अपनी गलतियां करने दे छोटी रकंम पर सीखी गई सीख सबसे बड़े नुकसान से बचाती हैं।

बच्चों को स्पष्ट कराएं  की पैसे किन चीजों पर खर्च करना हैं।
बच्चों को यह मालूम होना चाहिए की पॉकेट मनी किन चीजों के लिए है।
आइस क्रीम आइस क्रीम चॉकलेट खिलौना स्टीकर पेंसिल
अपने दोस्तों के साथ छोटा सा आउटिंग।

पॉकेट मनी से उन्हें क्या नहीं करना है। 
जरूर की चीज चीज स्कूल बैग शूज खाना डॉक्टर स्कूल फीस किताबें यूनिफॉर्म इन सब चीजों के लिए आप उन्हें यह पैसा नहीं दे रहे हैं बल्कि उन्हें उनकी जरूरत पूरी करने के लिए दे रहे हैं यह सब काम आपका है बच्चों को यह सिखाएं यह सब आपके माता-पिता का काम है।


पूरा पोस्ट पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद!