क्या आपका भी बच्चा छोटी-छोटी बातों पर चिखता चिल्लाता है, जमीन पर लोटता है, चीजें फेंकता है या मारपीट करने लगता है?
मम्मी, अब टीवी बंद नहीं करूंगा, नहीं खाऊंगा खाना, मुझे वह टॉय चाहिए। क्या ये सब डायलॉग आपको रोजाना सुनाई देते हैं?
अगर हाँ, तो आप इस दुनिया के अकेले इंसान नहीं हैं। बच्चों में जिद और गुस्सा होने कि वजह आज के समय की सबसे आम समस्या है। हर माता-पिता इस दौर से गुजरते हैं।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि बच्चों का यह गुस्सा और जिद उनकी भावनाओं को व्यक्त करने का एक तरीका है। बच्चे छोटे होते हैं उनहे अपनी बात कहने के लिए शब्दों की कमी होती है। समझ नहीं पाते हैं सलिए वे रोना चिखना चिल्लाना जिद करना ये सब करते हैं।
तो लिए हम इस पोस्ट में यह जानेंगे कि बच्चों में जिद और गुस्सा क्यों होता है। इसे कैसे पहचानें बच्चों को बिना डांटे-पीटे शांत और समझदार बच्चा कैसे पालें।
बच्चों में जिद और गुस्सा क्यों होता है इसका मुख्य कारण क्या है?
सबसे पहले हमें यह जानना है कि हमारा बच्चा हम पर गुस्सा क्यों कर रहा है अगर हम कारण जान लेंगे तो समाधान ढूंढ कर बच्चों को हम शांत भी कर सकते हैं।
कम उम्र के बच्चों को अपनी बात कहने का तरीका ना होना।
2 से 5 साल के बच्चों के पास शब्दों की कमी होती है जो वह कुछ कहना चाहते हैं पर क्या नहीं बातें जैसे कि मैं थका हूं मैं भूखा हूं मुझे नहीं खेलना मुझे नहीं खाना इसलिए रोना चिल्लाना सीखना इन सब के जरिए बच्चा अपना गुस्सा निकालता है। अपनी तरफ ध्यान आकर्षित करने के लिए बच्चा किसी चीज की डिमांड करेगा जिद करेगा ताकि उसके ऊपर अपना ध्यान आकर्षित हो ज्यादातर बच्चा अगर थका हो भूखा हो नींद पूरी न हो कोई खिलौना चॉकलेट जो उसे तुरंत चहिए और ना मिले छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करें यह सबसे आम कारण है।
नियम और सीमाओं का विरोध।
जब बच्चा पहली बार ना सुनता है तो उसे बहुत बुरा लगता है सीखने और चिल्लाने लगता है रोने लगता है जैसे उसके माता-पिता ने उसकोक्या कह दिय जो से बिल्कुल नहीं सुनना बच्चा अपनी सीमाओं का टेस्ट करतें हैं। मैं रो कर अपनी बात मनवा सकता हूं।
माता-पिता की आदतों की नकल करना।
बच्चे तो वही करते हैं जो वह अपने माता-पिता को देखते हैं। अगर आप खुद चिखते चिल्लाते हैं तो बच्चा भी जो देखता है वही सिखता हैं।
बदलाव से तनाव होना।
बच्चों में बदलाव से तनाव होना आम बात है जैसे बच्चे खेल रहे हैं और उन्हें वहां से हटाकर उन्हें कहा जाए कि चलो खाना खाने से बच्चे तनाव में आ जाते हैं क्योंकि यह बदलाव उसे पसंद नहीं है इसलिए बच्चा गुस्सा जाता है।
बच्चों में जिद और गुस्से के लक्षण को कैसे पहचाने।
हर बच्चा अलग-अलग तरीके से गुस्सा दिखता है इसके कुछ आम लक्षण है।
1 से 2 साल का बच्चा रोना चिल्लाना शरीर को अकड़ाना पीछे की ओर झुकना।
2 से 4 साल का बच्चा रोना जमीन पर लौटना चीज देखना सर पटकना यह सब करते हैं ।
4 से 6 साल का बच्चा दरवाजा पीटना चीज तोड़ना गाली देना जीद करना यह सब करता है।
6 प्लस का बच्चा तो मुंह फुलाना चीज तोड़ना कमरे में जाकर बंद हो जाना यह सब करने लगता है।
शांत और समझदार बच्चा पालने के कुछ आसान तरीका यह है। बच्चों के गुस्से और जिद को शांत करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जब बच्चा गुस्सा कर रहा हो तो क्या करें और क्या न करें।
सबसे जरूरी बात खुद शांत रहे।
जब बच्चा गुस्सा कर रहा है तो आपको शांत रहना है ना कि बच्चों के साथ आपको भी चीखना और चिल्लाना इससे यही होगा कि आग में घी डालने का काम हो रहा है। गहरी गहरी सांस में यह तो बच्चा है इसका टैंट्रम तो चलेगा ही हमेशा शांत लहजे में बच्चों से बात करें याद रखिए आप अगर शांत रहेंगे तो बच्चा भी शांत रहेगा।
प्यार से गले लगाएं।
बच्चों को प्यार से गले लगाए और उन्हें शांत करने की कोशिश करें और उन्हें बार-बार बोले कि मैं तुमसे प्यार करती हूं चाहे वह कितना ही गुस्सा क्यों न कर रहा हो आपको मार रहा हूं तो थोड़ी दूरी बनाकर ही सही लेकिन उसे गले लगाए रहे उसे सुकून मिलेगा तनाव कम होगा और बच्चा सुरक्षित महसूस करेगा।
ध्यान भटकाने की कोशिश करें।
ध्यान भटकाने के लिए आप उन्हें कहें की चलो मैं तुम्हें कहानी सुनाती हूं चलो तुम्हारे साथ एक गेम खेलते हैं या देखो यह कौन आया है विंडो के बाहर देखो कोई बर्ड आई है छोटे बच्चे 2 से 5 साल के बच्चों का ध्यान भटकना तो आसान है उसे भुला दे इस चीज में। लेकिन वहीं पर अगर बड़े बच्चे हैं तो यह तरीका हर बार कारगर नहीं होगा।
कुछ विकल्प दें।
बच्चों को विकल्प और नियंत्रण का एहसास देना भी जरूरी है तभी बच्चों को लगेगा कि उसकी भी कोई राय है चलो बताओ तुम्हें क्या चाहिए पर विकल्प भी ऐसा देना है की जो आपको दोनों में स्वीकार्य हो कौन सी बॉल चाहिए ब्लू या रेड पहले खाना खा लो या फिर पढ़ाई कर लो बाहर घूमने जाना है या कर के साथ खेलना है।
बच्चों की बात सुनें व उनकी भावनाओं को समझें।
बच्चे को यह समझ नहीं आता कि वह क्या महसूस कर रहा हैआपको उनकी भावनाओं को समझना जरूरी है।
तुम उदास हो क्योंकि अब खेलने का टाइम खत्म हो गया।परहाई करना है।
कभी-कभी बच्चा सिर्फ इसलिए जिद करता है क्योंकि उसे लगता है कि कोई उसकी बात नहीं सुन रहा।आँखों में आँखें डालकर बैठें उसे अपनी पूरी बात कहने दें बीच में टोकें नहीं।
बच्चों की बात खत्म होने के बाद ही आप अपनी बात रखें।
जब बच्चे को पता चलेगा कि आप उनकी भावनाओं को समझ रहे हैं तो वह धीरे-धीरे शांत हो जायगा।
अच्छे व्यवहार की तारीफ करें।
अचछे व्यवहार पर तारीफ करने से बच्चों को समझ में आता है कि अच्छे व्यवहार पर ध्यान मिलता है, गलत व्यवहार पर नहीं। जब बच्चा गुस्सा न करे शांत रहे, या कोई अच्छा व्यवहार करे तो उसकी तारीफ करना न भूलें।
आज तुमने बिना जिद के खाना खा लिया। अच्छी बात है तुमने अपने दोस्तों के साथ खिलौना शेयर किया।
स्क्रीन टाइम पर कंट्रोल करें।
ज्यादातर स्क्रीन टाइम ही बच्चों में चिड़चिड़ापन और गुस्सा बढ़ाता है। इसलिए आपको बच्चे की स्क्रीन टाइम पर कंट्रोल करना है।
2 से 5 साल के बच्चे एक दिन में एक घंटे से ज्यादा स्क्रीन टाइम का इस्तेमाल ना करें।
5 से 12 साल के बच्चे दिन में 1.5-2 घंटे से ज्यादा स्क्रीन टाइम का इस्तेमाल ना करें।
सोने से 1 घंटे पहले कोई स्क्रीन नहीं।
स्क्रीन के बदले आउटडोर गेम्स बच्चों के साथ में खेले किताबें, क्रिएटिव एक्टिविटीज दें।
गुस्से के बाद बच्चे से बात करें डांटें नहीं।
जब बच्चा पूरी तरह से शांत हो जाए तब उससे प्यार से बात करें गुस्से के समय समझाने का कोई फायदा नहीं होता।
अब तुम शांत हो गए हो चलो बात करते हैं।
तुम्हें इतना गुस्सा क्यों आया
अगली बार जब गुस्सा आएगा तो तुम क्या करोगे
उसे गुस्सा दिखाने के सही तरीके सिखाएं गुस्सा आए तो बोल सकते हो मुझे गुस्सा है लेकिन चीजें नहीं फेंकनी तोड़ना नहीं चाहिए ये बहुत ग़लत बात है।
प्रिये माता-पिता।
बच्चों में जिद और गुस्सा करना कोई बीमारी नहीं है। बल्कि यह उनके विकास का एक सामान्य हिस्सा है। वे अपनी भावनाओं को व्यक्त करना सीख रहे हैं, और यह एक लंबी प्रक्रिया है। और आपका काम है खुद के उपर धैर्य रखना बच्चों को प्यार से समझाना सही उदाहरण पेश करना।
जिद और गुस्से के पीछे हमेशा कोई न कोई कारण होता है। उसे खोजें।
डांटने-पीटने से बच्चा सीखता नहीं, बस डरता है।
आपका प्यार और शांति ही आप और आपके बच्चे के लिए सबसे बड़ा हथियार है।
अपने दील पे हाथ रख कर खूद को समझायेंगे यह समय भी गुजर जाएगा दुनिया के हर माता-पिता इस दौर से गुजरते हैं। मैं भी गुजर रही हूं।
जब आप शांत रहेंगे, तो बच्चा भी आपका शांत रहना सीखेगा। जब आप प्यार से गले लगाकर उसे समझाएंगे, तो वह भी प्यार से समझेगा। यह कोई एक दिन की प्रक्रिया से नहीं होता है लगातार कोशिश करने से आपका बच्चा जरूर एकदीन शांत समझदार खुश इंसान बनेगा।
पूरा पोस्ट पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद।