वर्किंग मॉम ऑफिस और बच्चे के बीच संतुलन कैसे बनाएं?

सुबह 6 या 5 बजे उठना, बच्चों को तैयार करना, उसका टिफिन बनाना, खुद कि ऑफिस के लिए तैयार होना व खुद का टिफिन को तैयार करना अगर हस्बैंड ऑफिस जाते हैं तो उनकी टिफिन तैयार करना। 8-9 घंटे की ड्यूटी ऑफिस की आफिस से वापस आकर बच्चे के साथ समय बिताना,  उनका होमवर्क कराना, घर के काम संभालना खाना बनाना और फिर अगले दिन की तैयारी करना यह सिर्फ दिनचर्या नहीं है। यह हर वर्किंग मॉम की जिंदगी का हिस्सा है।


आज के समय में महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ कर हिस्सा ले रही हैं। वह ऑफिस में एक बॉस है और घर में  वो माँ। लेकिन वहीं पर सवाल यह होता है की इन दोनों भूमिकाओं को निभाना आसान नहीं है। ऑफिस में घर और बच्चों की याद आना और घर आने तक कुछ अधूरा काम अगर ऑफिस का काम छूटा तो उसकी टेंशन अलग इन सबको वर्किंग मॉम को हैंडल करना काफी मुश्किल होता है कहीं ना कहीं मां को भी लगता हैं वह अपने बच्चों को अपने परिवार को टाइम नहीं दे पा रही और कभी-कभी बच्चे भी गिल्ट फील करते हैं तो आईए जानते हैं इस पोस्ट में की एक वर्किंग मॉम ओफिस और बच्चे की जिम्मेदारी कैसे संभालें।

एक वर्किंग मॉम के सामने यह सभी चुनौती आती है। वर्किंग मॉम के लिए सबसे बड़ी चुनौती तो यह आती है की इन सब को एक साथ कैसे मैनेज करें। आईए जानते हैं इस पोस्ट में वर्किंग मॉम ऑफिस घर और बच्चे कैसे संभाले। 

समय की कमी।

एक वर्किंग मॉम को 24 घंटे भी कम पड़ जाते हैं घर बच्चा ऑफिस सबके लिए टाइम निकालना काफी मुश्किल होता है। 


अपने बच्चे की देखभाल की व्यवस्था किसपे छोरे।

किसी पर भरोसा करना या नैनी रखना या  फिर बच्चों को डे केयर में भेजना यह अपने आप में एक बहुत बड़ा चुनौती से भरा सवाल है।


थकान और बर्नआउट।

सुबह के 5:00 बजे से लेकर रात तक की भाग दौड़ के बाद दिमाग और शरीर इस कदर थक जाते हैं की कुछ सोचने को भी मन नहीं करता और खुद के लिए क्या समय निकाले। थकान इस तरह होती है कि खाना खाना तो दूर खन अंदर सही से जाता भी नहीं अगर आपके बच्चे छोटे हैं तो और भी परेशानी है। इतना ही नहीं घर में बच्चों की जरूरत को पूरा करना और ऑफिस में डेट लाइन इन दोनों को एक साथ मैनेज करना एक वर्किंग मॉम के लिए काफी मुश्किल होता है।


सोशल प्रेशर और जजमेंट।

बच्चे तो नेगलेक्ट हो रहै हैं ऊपर से लोगों का कहना है कि पैसे लिए बच्चे को छोड़ दिया। इस तरह की बातें चलते हुए भी सुनने को मिलती है।


गिल्टी फील करना।

सबसे बड़ी चुनौती तो ये है कि बच्चे को छोड़कर ऑफिस जाते वक्त या उनके स्कूल से फोन आने पर या बच्चे की बीमारी के समय बच्चा जब बीमार पड़े यह गिल्ट बार-बार एक वर्किंग मॉम को काफी परेशान करता है।

अब जब हमने चुनौतियो को समझ लीया हैं तो आइए जानते हैं इस पोस्ट में उनके कूछ प्रैक्टिकल समाधान।


 

रूटीन आपकी सबसे अच्छी दोस्त है।

एक नियमित दिनचर्या वर्किंग मॉम की लाइफ को  बेहतर और आसान बना देती है। जब आपका काम सब कुछ प्लान से होगा तो भागदौड़ थोड़ी कम होगी।



सैंपल रूटीन।

समय काम
सुबह 5:00 बजे फ्रेश और खुद के लिए समय मेडिटेशन,थोड़ी धूप, व एक्सरसाइज।

सुबह 6:00 बजे बच्चे को उठाना स्कूल कि तैयारी करवाना।

सुबह 7:00 बजे नाश्ता करना व बच्चे का टिफिन पैक।

सुबह 8:00 बजे बच्चे को स्कूल/डे केयर छोड़ना व खुद के लिए लंच पैक।

सुबह 9:00 बजे ऑफिस पहुंचना।

शाम  को 6:00 बजे घर लौटना।

शाम को 7:00 बजे से बच्चे के साथ क्वालिटी टाइम बिताए।

रात को 8:30 बजे डिनर और होमवर्क करवाना।

रात को 9:30 बजे बच्चे को सुलाना और खुद का मी टाइम भी होना।


परफेक्ट बनने कि जरूरत नहीं बैलेंस्ड बनें।


सबसे पहली बात तो आप अपने दिमाग में बिता लीजिए की हर इंसान परफेक्ट नहीं होता ना तो वह परफेक्ट मैन हो सकती है और नहीं ऑफिस के काम में परफेक्ट कर्मचारी इसलिए खुद को हर चीज में नापतोल करना छोड़ दीजिए और अपने दिनचर्या को बैलेंस करके चलिए बैलेंस करने से ही सब कुछ परफेक्ट होगा। घर में कभी सिंपल खाना बना ले तो भी ठीक है कभी बच्चों को जंक फूड दे दे तो भी ठीक है ऑफिस में कोई भी काम छूट जाए तो भी ठीक है याद रखिए एक गोल्डन रुल परफेक्ट बनने से बेहतर है गुड इनफ तो प्लीज बैलेंस करना सखिए। 



अपने बच्चे के साथ क्वालिटी टाइम जरुर बिताएं।

आप बच्चे के साथ दिन में सिर्फ 2 घंटे ही क्यों न हो लेकिन वो 2 घंटे पूरी तरह उनके साथ हों  बिना मोबाइल फोन के बिना कोई टेंशन के उनके साथ खेले गले लगे उन्हें प्यार दें उनकी मनपसंद ड्राइंग या डांस करें कोई कहानी सनाएंरें उन्हें भरोसा दिलाए उनके दिन के बारे में बात करें।


अपने पार्टनर के साथ सपोर्ट पोर्ट सिस्टम बनाएं।


आप अकेले कुछ नहीं कर सकती इसलिए आप अपने पार्टनर के साथ सपोर्ट सिस्टम बनाएं अपने पति की मदद ले घर के काम बांटले बच्चों को नहलाने बच्चों को सुलाने बच्चे का होमवर्क करने मे आप अपने पार्टनर की हेल्प ले सकते हैं। इसमें कोई संकोच ना करें  अगर सपोर्ट है तो नाना नानी दादी दादी ताऊ चाचा इन सभी की मदद ले क्योंकि एक मां की अकेली जिम्मेदारी नहीं है आप अकेले कुछ नहीं कर पाएंगे। हो सके तके तो आप एक अच्छी नैनी भी रख सकते हैं। सब कुछ नहीं कर सकतीं। यह कोई कमजोरी नहीं है। घर का काम आप अकेले ना करें पति को बोल मार्केटिंग का काम कुछ किचन का काम अपने बच्चों को छोटे-छोटे काम और वह अपनी जरूरत को पूरा करने की जिम्मेदारी सौंपे जैसे बैग पैक करना लंच बॉक्स स्कूल से आने के बाद किचन में रखना शूज सही रखना इत्यादि।


मील प्रीप्लानिंग करें।


हफ्ते में एक दिन जैसे रविवार के दिन पूरी प्लानिंग कर ल
 सब्जियां कटवा कर फ्रिज में रखते हैं सुबह के नाश्ते की सामग्री रात को ही तैयार कर ले कुछ सब्जियों काट कर रात को ही रख दें हफ्ते भर का मेनू डिसाइड करें कुछ चीज ऐसी है जो फ्रिज में स्टोर की जा सकती है जैसे चटनी दाल वगैरह इससे किचन की भाग दौड़ काम हो जाएगी और आप थोड़ा स्ट्रेस फ्री फिल करेंगी।


बच्चों को प्यार से समझाएं। 

अपने बच्चों को प्यार से समझाएं बच्चे अगर ज्यादा छोटे हैं तो उन्हें प्यार से समझाएं कि आपकी मम्मा कम पड़ जाती है और वहां लोगों की हेल्प करती है बस दिनभर की बात है शाम को मामा वापस आएगी औरतुम्हारे साथसाथ खूब मस्ती करेंगी। बच्चा समझ जाएगा तो आपको ज्यादा परेशानी नहीं होगी।


अगर बच्चे बीमार हो जाए तो क्या करें। 

अगर बच्चे बीमार हो जाए तो आप वर्क फ्रॉम होम की जॉब कर सकती अपने ऑफिस में बात करके कुछ दिनों के लिए वर्क फ्रॉम होम कर लीजिए।


स्मार्ट टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करें। 


आज के जनरेशन में सब कुछ ऑनलाइन ही आता है आप चाहे तो कुछ ग्रोसरी वगैरा ऑनलाइन ऑर्डर कर सकती हैं । बच्चों के स्कूल के लिए एप्स का इस्तेमाल कर सकती हैं। 


खुद के लिए भी थोड़ा समय निकालें।

एक वर्किंग मॉम सिर्फ वर्किंग मॉम बनकर  नहीं रह सकती और ना ही वह कोई कर्मचारी है वह भी एक इंसान है और एक मां को भी खुद के लिए थोड़ा समय की जरूरत है इसलिए आप अपने ऊपर भी थोड़ा समय दे अगर ज्यादा ना हो सके तो कम से कम 20 मिनट ही सही अपने लिए थोड़ा समय दें अपने मनपसंद चीजों को करें मेडिटेशन पार्लर हेयर स्पा जैसे आपको जो कुछ अच्छा लगे वह आप कर सकती हैं सेल्फ केयर भी जरूरी है 


पूरा पोस्ट पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद।